गुरु शिष्य का संबंध बुद्धि जन्य होता है , वो ज्यादा देर तक टिका नहीं रह सकता ।
मां बाप, भाई बहन का संबंध हृदय से होता है , जो एक दुसरे पर टिका होने से पजेसिव होता है ।
और मित्र का संबंध नाभि से होता है , उसमें कोई लेना-देना नहीं होता , कोई पजेसन नहीं होता , इसलिए उससे मधुर कोई संबंध नहीं होता ।
- ओशो ।