शीर्षक: मोहब्बत उनकी
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रास न आई जिंदगी, उनके बिना
फिर भी ख्याल यही रहा है, जीना
पीने की चाह नहीं, था गम भूल जाना
मधुशाला में बैठे है, खाली, फिर भी पैमाना
दौर थे जो महफिलों के, अब वो याद नहीं
कभी हम थे उनके साथ, ये उन्हें याद नहीं
दस्तूर जज्बात के बदले, कोई फरियाद नहीं
बदला जमाना, रंजो-गम अब जरूरी भी नहीं
कल वो हमारे थे, उनकी सादगी के दीवाने थे
हक़ीक़क्त की हवाओं में, जलने वाले परवाने थे
कैसे कहते खंजर चलाने के, वो उस्ताद पुराने थे
हम से दूर हो जाने के, उनके पास हजारों बहाने थे
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali