1 पावस
पावस का स्वागत हुआ, गुमी उमस की छोर।
सारे दुख हैं हट गए, खुशियों की हिलकोर।।
2 सावन
सावन-भादों में चली, मेघों की बारात।
हरियाली घोड़े चढ़ी, पावस की सौगात।।
3 बरसात
तन भींगा बरसात में, मौसम का है शोर।
पड़ी फुहारें अंग पर, नाच उठा मन मोर।।
4 धान
सावन की बौछार ने, भरे खेत के पेट।
रोपे-धान किसान ने, जो था मटिया-मेट।।
5 नदियाँ
मेघों से अमृत लिया , नदियाँ हुईं सजीव।
मीठे जल को ले चलीं, बनकर के राजीव।।
मनोज कुमार शुक्ल " मनोज "
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