आज गुरु पूर्णिमा है
*गुरु*
*"गुरु"* कोई *"व्यक्ति"* नहीं,
कोई *"शरीर"* नहीं,
*"गुरु"* एक *"तत्व"* है , एक *"शक्ति है"* ।
*"गुरु" यदि *"शरीर"* होते, तो इस छोटी सी "दुनिया" में, एक ही *"गुरु" "पर्याप्त"* होते ।
*"गुरु"* एक *"भाव"* है,
*"गुरु" "श्रद्धा"* है ।
*"गुरु" "समर्पण"* है ।
आपका *"गुरु:* आपके *"व्यक्तित्व"* का *"परिचय"* है ।
*"कब" "कौन", "कैसे"* आपके लिये *"गुरु" "साबित"* हो,
यह आप की *"दृष्टि "एवं "मनोभाव"* पर निर्भर करता है ।
*"गुरु" "प्रार्थना"* से मिलते हैं ।
*"गुरु" "समर्पण"* से मिलते हैं,
*"गुरु" "दृष्टा" "भाव"* से मिलते हैं,
*“गुरु" "किस्मत"* से मिलते हैं ।
और..........
*“गुरु" "किस्मत" वालों को "मिलते" हैं ।*
*गुरू पूर्णिमा पर आपको गुरु आशीष प्राप्त हो*
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