क्यों मेरी बात पर तुम इस तरह रूठ जाते हो।
मेरा नाम लिख के दिल पर बार बार मिटाते हो।
तुम अजनबी तो नहीं पहचानता हूँ सदियों से।
हँसना भी चाहूं तो तुम क्यों रुला जाते हो।
मिलना बिछड़ना सब खेल है जिंदगी का।
खुद में व्यस्त रहो क्यों दिल लगाते हो।
तुम्हीं चाहते थे मुझसे अलग हो जाने को
जाओ खुश रहो अब क्यो पछताते हो।