" मैं बेसहारा नही "
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जिंदा हु इसलिए , कि मौत से हारा नही ।
किसी का साथ हो ना हो , मै बेसहारा नही ।।
प्यासा रहा मै दरिया में , ना लगी प्यास सहरा में ;
लाचार कभी ना हुआ , ना कभी बेचारा नही ।।
एक चिनगारी भी काफी है , दीप जलाने को ;
रोशन कर सकता हूं संसार , चाहे सितारा नही ।।
मै पंछी की तरहां उड़ जाऊंगा , आसमान में कही ;
दूर गगन में उड़ता है , उसका कोई किनारा नही ।।
सब मतलबी है , किसी का कोई विश्वास नही ;
" Bन्दास " आज मुझको मेरे बिना , कोई प्यारा नही ।।
✍️ " Bन्दास "
राकेश वी सोलंकी ।