*जय मां शैलपुत्री*
*कुंडली में ज्योतिषीय योग*
वैसे तो कुंडली में ज्योतिष बनने के लिए बहुत सारे योग होते हैं।
कुछ योग ज्योतिषीय ज्ञान देते हैं, कुछ ज्योतिष शास्त्र सीखने की ललक तो कुछ ज्योतिष के रूप में मान सम्मान और कमाई भी देते हैं।
मैं यहां पर कुछ महत्वपूर्ण योगों का वर्णन कर रहा हूं।
*ग्रह*
गुरु, शुक्र, बुध, शनि, केतु
*गुरु* आत्मज्ञान, ज्ञान, परोपकार और आध्यात्म देगा।
*शुक्र* ज्ञान, तपस्या और शोध देगा
*बुध* गणितीय ज्ञान और वाकपटुता देगा
*शनि* गूढ़ता, न्यायदृष्टि और आध्यात्म देगा
*केतु* आत्मज्ञान, आध्यात्म और तंत्र मंत्र का ज्ञान देगा
*भाव*
प्रथम, द्वितीय, पंचम, अष्टम, नवम
*प्रथम* ज्योतिष के प्रति लगन और इच्छाशक्ति देगा
*द्वितीय* अच्छी वाणी और अच्छी आय देगा
*पंचम* पूर्वाभास, पूर्व संस्कार, ज्ञान और विज्ञान देगा
*अष्टम* गुप्त ज्ञान, तर्क वितर्क की क्षमता, आत्मज्ञान, आध्यात्म रिसर्च और तंत्र मंत्र के रहस्य देगा
*नवम* धर्म, आध्यात्म, परंपरा और संस्कार देगा
*भावों में पंचम, अष्टम और नवम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।*
*द्वितीय भाव से हम ज्योतिष की प्रोग्रेस (कमाई और मान सम्मान) देखते हैं ज्योतिषीय ज्ञान नहीं।*
यदि उपरोक्त भावों, भावेशों और ग्रहों के मध्य किसी भी प्रकार का संबंध बनता हो तो जातक ज्योतिषीय ज्ञान की तरफ जाता है या आकर्षित होता है।
*उदाहरण के रूप में मैं यहां पर अपने एक क्लाइंट की कुंडली में उपस्थित योगों का वर्णन कर रहा हूं जो कि वर्तमान में ज्योतिष सीख रहे हैं:—*
✓ पंचम भाव में लग्नेश, अष्टमेश और नवमेश एक साथ विद्यमान हैं
✓शुक्र, गुरु और शनि तीनों पंचम भाव में विद्यमान हैं।
✓ नवम भाव में बैठे केतु अपनी नौवीं दृष्टि से पंचम भाव को देख रहे हैं
*ज्योतिषाचार्य डॉ दीपक सिक्का*
*8178337165*
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