Hindi Quote in Poem by Pramila Kaushik

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उत्तर सखी की पाती का **************************
मेरी प्यारी सखी तुमने जो पाती लिखी।
उसमें मुझे तुम्हारी अन्तर्व्यथा दिखी।।
सभी के दिल में भावनाओं की सरी है।
जो अनगिनत रंगों के जल से भरी है।।
कटु - मृदु कहती चली जा रही है।
उमड़ती उफनती बही जा रही है।।
किसमें है साहस कि टोके इसे।
किसमें है हिम्मत कि रोके इसे।।
इसलिए निर्द्वन्द्व इसे यूँ बहने दो।
अपने मन की इसे भी कहने दो।।

रिश्तों को कहीं हम धर दें किनारे।
और तब स्वतंत्र हो हम ये विचारें।।
स्नेह संबंध ही मज़बूत और वास्तविक हैं।
शेष सब रिश्ते झूठे और औपचारिक हैं।।
हम तुम भी कहीं ननद तो भाभी हैं कहीं।
कहीं बहू, कहीं बहन तो बेटी भी हैं कहीं।।
हम चाहें तो लहरों का रुख ही बदल दें।
चाहें तो सिक्के का पहलू ही बदल दें।।

प्यार धन दौलत का मोहताज नहीं।
प्रेम वह है जो कभी भी मरता नहीं।।
ये वस्तुएँ हैं, तब भी नहीं।
और नहीं हैं, तब भी नहीं।।
मनचाहा सदा नहीं हुआ करता है।
कभी ज़्यादा तो कभी कम मिला करता है।।
जहाँ लाभ हानि का गणित लगाए बिना
दिल जुड़े हों वहीं रिश्ता है प्यार का।
अगर हिसाब लगाने बैठ गए तो समझो
समझौता या सौदा था नाम से प्यार का।।

पत्र के अंत में तुमने जो क्षमायाचना की
तो इसकी आवश्यकता ही कहाँ बची ?
जब तुमने मुझे पत्र लिखने का विचार किया।
अपने मन को कागज़ पर उतार दिया।
समझ लो उसी क्षण तुमने स्वयं ही
खुद को माफ़ किया।
अब क्या ग़लती क्या माफ़ीनामा।
आओ शुरू करें नई स रे गा मा।।
प्यार के साथ बंद करती हूँ अब पाती को।
जलाए रखना सदा इस प्यार की बाती को।।
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अभिव्यक्ति - - - - प्रमिला कौशिक
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Hindi Poem by Pramila Kaushik : 111725029
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