शीर्षक: गुलदस्ता प्यार का
उनके गुलदस्ते में एक गुलाब हमारा भी था
उनके कदमों में, प्रेमित हो हमनें गिराया था
बहुत सोचकर, हमनें, खुद को समझाया था
दिल-जमीं पर साया, उनके ही पावों का था
बेरुखी उनकी, जब कभी मुस्कराहट बन जायेगी
जेहन में उनके, हमारी भूली हुई, याद फिर आयेगी
हम न रहें तो भी, एक बूंद तो पलकों में ठहर जायेगी
वफ़ा भी कोई चीज है, ये बात, समझ में आ जायेगी
शबनम सी, कोई हसीन रात जब ढल रही होगी
नूर की बूंद सी, हमारी मोहब्बत शमा बन जायेगी
कातिल नहीं होती, कोई गफलत, उठ कर कहेगी
हम कहां है, उनके दिल में, वो ढूंढने लग जायेगी
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali