अहंकार के आवरण को चल उतार फेंक,
अहंकार से जो हम परे हुए,
समझो परमात्मा के कुछ करीब हुए।
चलो प्रयास करके हम देखें,
अहंकार को दिखाते हैं आईना ।
नाश और सिर्फ नाश ,
अहंकार में छुपा है विनाश।
कब और कैसे कहूं यह कि
बुद्धि-विवेक और
मानवता का करता है सर्वनाश।
यौवन का अहंकार ना कर,
रूप सौन्दर्य सब वक्त ले जाएगा।
दर्पण में अपना अक्स देख,
हताश जमीं पर गिरा नज़र आएगा।
धन -दौलत वैभव को प्राप्त कर,
अभिमान से मकान भी भर जाएगा।
गर्व कर खुद पर तू जो इतराएगा,
आसमान पर उड़ने वाले आखिरकार,
धरा पर ही सोया हुआ स्वयं को पाएगा।
ओहदे का गुमान जो हो गया तुझे,
अपनों से दूर और तू खुद को भी न पाएगा।
इंसान विज्ञान पर विजय प्राप्त कर,
बन गया न जाने कब अहंकारी।
सबक सिखाने ईश्वर ने भी गज़ब की ठानी,
सजा का बन बैठा हर मानव अधिकारी।
अभिमान होता नहीं है अच्छा,
इसका बोझ सर्वदा होता भारी।
अब तो समझ जा, हे तुच्छ प्राणी
मित्रों, रिश्तों व परिवार से दूर तुम्हें,
अपना ही अहंकार तुझको है ले जाता।
'मैं' का घमंड जो हो गया तो ,
'हम' के गहन अर्थ को ना समझ पाता।
एकत्रित किया धन दौलत,
सब धरा पर ही धरा रह जाएगा।
तेरा किया ही बस संग तेरे जाएगा,
अभिमान किस बात का है ,
ईश्वर की दी सांसें, जिंदगी हो आभारी
घमंड का बीज तू खुद में बो रहा
ईश्वर नहीं लेगा फिर तेरी जिम्मेदारी।
घमंड को त्याग कर देख जरा,
जीवन होगा सफल व हितकारी।
अहंकार से जो हम परे हुए,
समझो परमात्मा के कुछ करीब हुए।