तुम ज़रा सा दर्द दे कर खुश हो जाते हो।
मगर मेरी उम्मीद तुमसे कुछ ज्यादा है।
तुम्हारे दिए जख्मों को कुरेदता हूँ रोज़।
इसी लिए मेरा घाव अभी ताज़ा है।
ये न समझो कि टूट जाऊँगा मैं ज़रा सी बात पर।
इससे बड़े ग़म देखे हैं हमने ये तो बस आधा है।
रुक्मणि भले ही सिंदूर लगती हो कृष्ण के नाम का
मगर यह दुनिया जानती है प्यार तो सिर्फ राधा है।
एक दिन हम भी सूरज बन के चमकेंगे"अर्जुन"
अभी वक़्त मेरा नहीं है यह समय का तकाजा है।
-Arjun Allahabadi