रेखताके सौजन्य से🙏
उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन
दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में
दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में
इक आईना था टूट गया देख-भाल में
.........सीमाब अकराबादी
जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
....... जौन अलिया
ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं
पाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है
.........बशीर बद्र
होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है
इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
....निदा फ़ाज़ली