*प्रत्येक भाव कुछ नहीं अपितु बहुत कुछ कहता है*
आज बात करते है प्रथम भाव की।
प्रथम भाव यानि लग्न, यानि आप स्वयं, आपकी आदतें, आपकी हेल्थ, आपका स्वभाव, आप से संबंधित प्रत्येक बात लग्न से संबंधित है। लग्न ही बताता है कि आप कैसे हैं।
परंतु लग्न और भी बहुत कुछ बताता है
जैसे कि आपके परिवार (२ भाव) का व्यय है लग्न, आपके छोटे भाई बहन और आपके पराक्रम (३ भाव) की आय और इच्छा पूर्ति (प्राप्त होने वाला फल) है लग्न, आपकी माता (४भाव) का कार्यक्षेत्र (कर्म) है लग्न, आपके बच्चों (५ भाव) का भाग्य है लग्न, आपके शत्रुओं, ऋण, और रोग ६ भाव) से मिलने वाला आकस्मिक लाभ है लग्न, आपके जीवनसाथी ७ भाव) से सामंजस्य, प्रेम और साथ है लग्न, आपके गुप्त ज्ञान एवं आकस्मिक लाभ (८ भाव) का शत्रु है लग्न, आपके पिता (९ भाव) की संतान है लग्न एवं आपके धर्म (९ भाव) के संस्कार है लग्न, आपके पिता और कर्मों (१० भाव) से प्राप्त सुख है लग्न, आपकी आय और लाभ (११ भाव) से प्राप्त धन है लग्न, आपके व्यय (१२ भाव) की वृद्धि है लग्न।
तो इसलिए लग्न को केवल लग्न ही ना समझें अपितु बहुत कुछ है ये लग्न।
*ज्योतिषाचार्य डॉ दीपक सिक्का*
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