शीर्षक: जैसा सोचोगे वैसा ही बन जाओगे
फलसफा है जिंदगी का, शायद ही अपनाएंगे
एक दस्तूर समझ कर, समय पर भूल जाएंगे
हक़ीक़क्त भी कहती, चिंतन में शक्ति होती
साख फूलों की ही, चमन में खुशबू फैलाती
आलस्य की मखमली सेज, सब को सुहानी लगती
वजह शायद यही , कोई गलती अपनी नहीं लगती
माना सिर्फ सोच, कोई सफलता नहीं दे सकती
कर्म अनुसार ही, चिंतन के फूलों की क्यारी सजती
कहने वाले ने कहा, जैसा सोचोगे, वैसा बन जाओगे
बीज बबूल के लगाओगे, रसीले आम कहाँ से पाओगे
वक्त के हाथों मजबूर हो, जो चिंता नहीं चिंतन करते
ऐसे पथ के राही, जीने का हर जज्बा अपने नाम करते
✍️ कमल भंसाली