"गांव चले"
चल, दोस्त गांव चले,
मिट्टी के घर में रहने
का मझा कुछ और है,
आंगन में पेड़ पौधे की महक,
चिडीयों की चहक,
दिल खुश हो जाता हैं,
चल, दोस्त गांव चले ।
मेरे खेतों में आम के पेड़ों
के तले, छूपाछूपी खेलेंगे ,
तालाब में जाकर,
मछलियां गिनेंगे ।
चल, दोस्त गांव चले,
इमली के पेड़ को हिलाएंगे,
जामून भी गिराएंगे,
मौज-मस्ती से इमली,
जामुन खाएंगे ,
कौन ज्यादा खा सकता हैं,
इसकी हौड लगाएंगे,
चल, दोस्त गांव चले।
बचपन के दिन वो,
दोस्तों के संग वो,
पहाड़ों की चोटी पर से,
नदी में डुबकी लगाएंगे,
कछुए को ढूंढ लाएंगे,
बचपन को फिर जी पाएंगे,
चल, दोस्त गांव चले।
✍️...© drdhbhatt...