शीर्षक: अंदाज मोहब्बत का
अंदाज "मोहब्बत "का, कभी बयां नहीं होता
कभी, बेवफाई तो कभी रुसवाई भी दे जाता
चेहरा मुस्कराता, पर दिल अंदर से घबराता
न समझने वाली बात, नासमझ समझ जाता
कहते, दस्तूर हजारों मोहब्बत के होते
यहां तक की, जीने का अंदाज बदल देते
सोये, नयन में हरदम प्रियतम ही लहराते
साँसों के तूफ़ान से, लब भी थरथरा जाते
सुना, मोहब्बत बदल देती सोई हुई तकदीर
इसके लिए उठ जाते भाले, तलवार और तीर
बिछड़ी गई तो, तो आँखों से निकलता, नीर
मदहोशी में निकल जाता, दिखा दूँ, दिल चीर
मोहब्बत आसां नहीं, कह गए गए इसके शहीद
इसमे होता प्राय: रोजा, कभी कभार ही होती ईद
पाँव जमी पर नहीं रहते, उड़ता रहता बेखबर दिल
साजन की आहट, लगता, दूर है, अभी तो मंजिल
इश्क की नहीं कोई इंताह, इल्जामों से रखे दूर
अथाह शक का घेरा करता, करते इसे कमजोर
जुदाई के क्षणों में तन्हां, मायूस दिल होता, बेकरार
प्राणों की परवाह नहीं, पर इश्क रहे सदा सदाबहार
आरजू दिल करे, नयनों में छायी रहे मोहब्बत
पाक दामन रहे, उसी पर होती इसकी इनायत
जिसने मोहब्बत को समझा, वो जन्नत का राही
एक बून्द प्यार मिटा दे ,नफरत की हर बात कही
कहते है, खुदा की बेटी, हर प्राणी के जिगर में रहती
हवस की शिकार हो, अपने अस्तित्व को सदा कोसती
कोई, करतूत न हो, जो इसे शर्मसार, बदगुमां करती
आहों में दोजख, बाँहो में लोग कहते,"जन्नत" मिलती
अंत नहीं, प्रारम्भ समझना, मोहब्बत है, स्वर्णिम फूल
प्यार, जीवन का साज श्रृंगार, प्राणी,जरा इसे संभाल
बारिश में वंसुधरा देती जीवों को ऐसे अनेक उपहार
बता "कमल" उसके बिना ,कौन करेगा जग उद्धार ?
✍️कमल भंसाली