शीर्षक: जीना एक कला है
जीना है, तो अब उसके सब दस्तूर निभाओ
गफलत की, तो अंजाम के शिकार हो जाओ
कह रहे जानकार, हवा के परिंदे जहरीले हो गये
जीने के सारे मकसद अब ख़ौफ़ के मंजर बन गये
कल क्या होगा ? ये सवाल अब बेमानी सा लगता
हालात कह रहे अच्छा है, आज अगर सही बीत जाता
दहशत रहे मन में, तो आत्मा सिकुड़ कर रह जाती
निडरता से, आई हुई मुसीबत भी डर कर भाग जाती
जीना भी एक कला है, उसे कभी मजबूरी न समझना
प्रेम जीवन का उत्साह है, सदा दिल मे उसे जगह देना
समय की अपनी पहचान है, सच आज भी महान है
झूठ के पुलिंदे में बंधा जीवन, थका, पूरा ही बेजान है
निभाने को सब निभालों, पर एक बार भीतर झाँकलों
सब कुछ समझ जाओगे, हो सके तो,स्वयं को संभालों
✍️ कमल भंसाली