किल्लोल..........
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चिड़िया अपने पंखों को
मिट्टी में लोटती रहती हैं
धूल से सने पंखों को ही
ये फड़फड़ाती रहती है।
सूरज उगा किरणें फूटी
प्रातःकाल की भोर है
चिड़ियों की चहचहाट
से कैसा कलरव शोर है।
नैसर्गिक सौंदर्य बिखेरती
अप्रतिम दृश्य मनोहारी
झट से ओझल हो जाती
नित नई अदाएं बलिहारी
एम.एल. नत्थानी