अपने अपने उसुल होते हैं,
कितने सबको कबुल होते है।
चाहते रहे खुशी जमाने की,
ओर खुद से तो मलुल होते हैं ।
जिंदगी सांस सांस भटकाये,
जीनके दाअवे फुजुल होते हैं ।
शक्ल होती है बलाकी नुरानी,
हारमें जो लीपटे गुल होते हैं ।
ये करिश्मा हैदेखो फीतरत का,
खार की जद में ही फुल होते हैं ।
मनसे चाहता है कबा गुलाबो की,
उनके हिस्से मे तो बबुल होते हैं ।
कैसे मासूम नजर से गुजरे हैं ,
कइ मकसद बे फुजुल होते है।
मासूम मोडासवी