Hindi Quote in Poem by Archana Singh

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"सहमी जिंदगी"

रोज़ प्रातः उठ अब,

दहलीज लांघने से डर लगता।

सहम सी गई जिंदगी जैसे,

नज़र मिलाने से दर्द झलकता है।

सुख तलाशने की चाह में,

दुःख जैसे और गहन है हो जाता ।

न जाने कौन सा दिन आख़िरी,

बन जाए सोच मन दुखी होता।

खुशी की तलाश में जुट जाता,

जो समक्ष, करीब है उसे न भोग पाता।

अब भी रिश्तों की डोर जो न थामा।

तो शायद वक्त न देगा ये कोरोना।

शिकवे गिले दूर कर लें झट,

पल न ठहरा है कभी यहां।

सहमी सी जिंदगी है हुई,

कहीं सांस छीन न ले कोरोना। 

अब भी न जाने किस तलाश में है,

और पाने की होड़ में शामिल,

सब कुछ खोने का एहसास नहीं।

मिली परिवार में हर खुशियां,

फिर भी व्यर्थ में भटकता यूं ही,

तलाशता बहुत कुछ है यहां।

अफसोस ही रह जाएगा ,

जब आधी भी नहीं रहेगी और न ही

पूरा तू मन मुताबिक पाएगा। 

तलाश को खत्म कर यहीं,

दहलीज न लांघ अब।

वरना लक्ष्मण की न सुन कर,

हशर क्या हुआ था सिय का।

अपनों के संग जी ले हर लम्हा,

परम सुख है यही जीवन का।

और न तलाश कुछ यहां वहां,

दिल की नज़रों से देख तो

बहुत कुछ है महकते दामन में,

बस उसे है तुम्हें संभालना।

जो वक्त रहते अब न सीखा,

तो कोरोना तन्हा कर देगा तुम्हें यहां।

धन, वैभव और ऐश्वर्य सब होगा,

पर न होगा कोई अपना यहां। 


-------अर्चना सिंह जया

Hindi Poem by Archana Singh : 111711166
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