हमारे जो बनके पराये मीले हैं,
जहांने हमेशा जखम ही दीये है।
हुवा जोर हमपे जो सहे गये हम,
मगर हमनेअपने लब सी लीये है।
निबाही सदा ही सीतम की तडप,
बहेआंख सेसब अश्क पीलीये है।
भरोसा है टुटा जगी हसरतों का,
भुलाये नभुले जो वाअदे किये है।
रचा खेल उसने वफा खेलने का,
सदा हमने जेले जोसदमे दीये है।
छलकती रही आशनाइ हमारी,
उमीदो सेहमने युही लम्हें जीये है।
कदम फीरमासूम बढ़े उसतरफही
जहां से सदा हमकोगमही मीलेहै।
मासूम मोडासवी