रोशनी
अंधेरे में जी रहा हूं,
हो गए कई दिन,
अपनों से नहीं मिल पाया हूं,
कटते नहीं अब तो दिन।
आशा की किरण मेरे,
दिल मे जाग रही है,
निश्चित मिलेगी रोशनी मुझे,
मन ये मान रही है।
एक तरफ है बीमारी,
दूसरी तरफ है आशा,
निश्चित अब ठीक हो रहा हूं,
बदलेगी जीवन की परिभाषा।
देव् डॉक्टर की बातों से,
प्रकाश मिलने लगी है,
जल्द यहां से बाहर होउँगा,
रोशनी खिलने लगी है।
रोशनी की आभा में,
पहुँचूँगा अपनों के पास,
दिल मे एक आभा खिली है,
सब होंगे रोशनी में मेरे साथ।
शोभेन्द्र पटेल"राज"