नदी तेरा जीवन महान।
ले लेती है आकार
उपलब्ध जगह देखकर
कहीं हिमशिखर से गिरती
कहीं गौमुखी से निकलती
कहीं सकरी हो जाती
कहीं झरना बन लुभाती
कहीं चट्टानों से टकराती
कहीं सरलता से बहती
हरियाली के मध्य कहीं इठलाती
तो कहीं डैम से नियांत्रित होती
हर आकार में मस्त है रहती
और आखिर समुद्र को पाती
जीवन यूँही चलता रहता
नदी से सागर तक की यात्रा
यूँही युगों से चलती रही है
निरभय नहीं है अब यह रहती
दूषित जब जहाँ यह होती
अपना काल है इसको दिखता
वसुंधरा से बंधा है रिश्ता
माने धरा इसको फरिश्ता
देखो अगर इसको ध्यान से
पढ़ो अगर इसका विज्ञान
हो अगर तुम ज्ञानी-ध्यानी
फिर क्यों करते अपनी मनमानी
सीख सको तो तरीका सीखो
आकार बदलने का सलिखा सीखो।
निर्जीव है पर जीवन देती है
जीवित रहने के संसाधन देती है
नहीं लेती यह कुछ किसी से
बस बहती है और बहती रहती है।
कभी विकराल रूप जब धरतीं
सब कुछ नष्ट तुम हो करती
बह जाते हैं घर संसार
पीछे रह जाता है हाहाकार
यह जब होता है जानते सब हैं
विपदा के जन्मदाता जो हम हैं।
कितना कुछ सिखाती हैं नदियाँ
न सीख सके तो गुजर जायेंगी सदियाँ।
जीवन है जीने का नाम
नदी कहती जीवन को परमधाम ।
हो तुम एक सुंदर वरदान
नदी तुम हो बहुत महान।
Kalpana Bhatt
18 मई, 2021