Hindi Quote in Poem by TEJKARANJAIN

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मैं बोनसाई भारत हूँ
तेजकरण जैन
मैं भारत हूँ सदियों से मेरी कहानी इतिहास मे मार्गदर्शक के रूप मे सुनी जाती रही है, मैंने अपनी कोख से विश्व के चिकित्सा जगत को अपने अनुसंधान के लिए सुश्रुत, बाणभट्ट, चरक जैसे महान भारतीय चिकित्सकों, चिंतकों का सहारा दिया. मैं प्राकृतिक संपदा, स्वस्थ वातावरण, ऋषि, कृषि युक्त जीवन परंपरा, गौ आधारित वसुंधरा का स्वामी हू. मैं वहीं विशाल विश्व गुरु भारत हूं किन्तु मेरी ही संताने जो स्वार्थ परक नेताओं, हवस से भरे नागरिकों के रूप में बढ़ रही है. उनके चलते आज कोरोना महामारी के सामने मैं बोनसाई सा लगने लगा हूं. चुनाव में मेरे शीर्ष कद्दावर नेताओं की सत्ता लोलुपता इतनी बढ़ गई कि तीन महीने तक करोना टास्क फोर्स की बैठक लेना भूल गए, समिति के सभी सदस्य बोनसाई होकर रोना रोते रहे और मेरे नेता बेटे दीदी, मोदी करते रहे. चिताओं की ज्वाला देख आज आसमान तक रोने लगा है, मानव आक्सीजन के लिये मछली सा तड़प रहा है, मरता रहा है, मेरे घिनौने सन्तान नेता सिलेंडर अपनों को बांट रहे है, मैं गगन छुती मूर्तियों के सामने माला लिए अब बोनसाई सा लगने लगा हू...

Hindi Poem by TEJKARANJAIN : 111705930
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