1 उमंग
आतंकी है वायरस, कौन बचा हे नाथ।
अब उमंग उत्साह से, छूट रहा है साथ।।
2 कीर्तन
मंदिर में कीर्तन जमीं, प्रभु से जुड़ा लगाव।
छाया संकट दूर हो, भरें सभी के घाव।।
3 अक्षर
कविता अक्षर-धाम हैं, अक्षर-अक्षर मंत्र।
जप-तप है आराधना, संकट का है यंत्र।।
4 स्वप्न
स्वप्न सलोने खो रहे, छायी तम की रात।
प्रभु सबका कल्याण कर, आए सुखद प्रभात।।
5 प्रभात
गहरा तम जग से हटे, नव प्रभात की चाह।
यह आशा विश्वास ही, है जीवन की राह।।
6 करुणा
सेवा को तत्पर रहें, यही राह अब नेक।
हर मन में करुणा बसे, मानवता है एक।
मनोज कुमार शुक्ल " मनोज "
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