ख़ामोशी सिर्फ़ एक लफ़्ज़ नहीं,
खामोश रहना एक हुनर है जनाब।
मुस्कराकर आंखों से कह जाते हैं
तमाम बातें जब होंठ चुप रहते हैं।
जिन मुद्दों पर बहस करना नहीं,
जो जंग जुबान से जीत सकते नहीं
खामोशी एक अहम हथियार होता है।
खामोशी एक लाजबाब सलीका है,
जिंदगी जीने का कमाल तरीका है,
तमाम दर्द दिल में छिपा लेते हैं
जिनका फ़साना जमाना बना देता।
जहाँ हमारी बातों की सुनवाई न हो,
वहाँ खामोश रहना ही बेहतर है।
इसलिए ख़ामोशी सिर्फ़ लफ़्ज़ नहीं,
खामोश रहना एक हुनर है यारों।
रमा शर्मा 'मानवी'
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