भाव मे बीज मन ही डालता है , उसका कार्य सहेज कर विकसित करना , वह बीज किसी भी फल के हों | भावना स्वभाव से सदैव निर्मल होती है , स्वभाव मे विकसित हो यह ईश्वरीय गुण धारण करती है किन्तु यदि बाहरी मिलावट मे वैसा ही परिणाम देती है , अक्सर मन की धूर्तता ही भावना के पतन का कारण होता है |
-Ruchi Dixit