आखिर वह क्या रहस्य था।
विकास एक प्रकृति प्रेमी व्यक्ति था जिसे कुत्तों से बहुत प्यार था। उसके पास अलशेसियन श्रेणी का एक कुत्ता था जिसे वह चीकू नाम से पुकारता था वह भी यह नाम सुनकर आत्मविभोर होकर जहाँ भी रहता था तुरंत अपने मालिक के पास भागकर आ जाता था। विकास की पत्नी कमला को जानवरों से कोई स्नेह नही था और वह उनसे बहुत डरती थी। एक दिन चीकू ने एक मामूली सी गलती पर अपने मालिक के नौकर का हाथ काट लिया जिससे उसे बहुत पीडा हुयी। इस घटना के बाद से कमला के दिमाग में यह बात घुस गयी थी कि चीकू के कारण परिवार में कोई ना कोई अप्रिय घटना घट सकती है और उसने विकास को चीकू को हटाने के लिये बहुत दबाव बनाकर स्पष्ट कह दिया कि या तो चीकू रहेगा या वह रहेगी। विकास ने अनेको बार अपनी पत्नी को इस विषय में समझाना परंतु वह उसे समझा पाने में असमर्थ रहा। कमला अपनी बात पर अडिग थी अंततः विकास को अपने सबसे प्यारे और वफादार कुत्ते चीकू को बहुत अनिच्छा के साथ एक गांव के पास छोडना पडा। अकेले होने के कारण चीकू की कुछ ही दिनों में मृत्यु हो गयी।
इस घटना के दस वर्ष बाद विकास को अपने परिवार के साथ प्रदेश के एक सुप्रसिद्ध अभयारण्य में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। वे भी अन्य पर्यटकों के साथ साथ जीप सफारी में भ्रमण हेतु रवाना हुये रास्ते में उन्हें एक स्थान पर एक बहुत सुंदर और बडा शेर देखने को मिला। उसे देखते ही विकास के मुंह से अचानक चीकू स्वर का आर्तनाद हुआ। उसके मुँह से धीरे से चीकू शब्द निकला। उस शेर ने उस शब्द को सुनकर पीछे की ओर घूमकर देखा और देानो एक दूसरे की ओर टकटकी लगाये जैसे एक दूसरे में खो गये। ऐसा लगा जैसे उनमें आँखों ही आँखों में वार्तालाप चल रहा हो। यह दृष्य इतना भावपूर्ण था कि विकास और शेर तो इसमें मग्न हो गये परंतु बाकी के पर्यटक और शासकीय कर्मचारी भाग खडे हुए। अब उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना प्राप्त होते ही उनके द्वारा बख्तरबंद गाडियाँ एवं सशस्त्र सुरक्षाबलों को भेजा गया। वहाँ पहुँचकर उन्होंने शेर को घेरने का प्रयास जैसे ही प्रारंभ किया वैसे ही वह शेर मानो विकास को अंतिम बार नमस्कार करते हुए अपनी पूर्ण शक्ति के साथ दहाडकर घने जंगल में चला गया।
विकास ने वन्य अधिकारियों से पुनः वहाँ जाने का निवेदन किया परंतु सुरक्षा की दृष्टि से उसके वहाँ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उस शेर की जांच करने के उपरांत यह पता हुआ की उसकी गिनती उस जंगल में मौजूद शेरों में नही थी। काफी प्रयास करने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारी उस शेर के बारे में कुछ पता नही लगा सके। यह एक अद्भुत घटना थी जिसका संबंध पुनर्जन्म से था या महज एक इत्तफाक जिसका रहस्य आज भी बना हुआ है।