मजदूर दिवस
चलो, बात करें
मजदूर के बारे में,
जिसके हाथ के निशान
हमारी खिड़कियों, दरवाजों,
और दीवारों पर पड़े हैं ।
वह हमारे घर की नींव रखेगा
और गृह प्रवेश में
हवा की तरह अदृश्य हो जायेगा।
उसके हाथों के निशान
हमारे मंदिरों से एकाकार हो,
उसकी दुविधाओं - चिंताओं को
निरीह थकान में समेटे हैं ।
चलो, आज बात करें
मजदूर दिवस की। |
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© महेश एस. रौतेला
०१.०५.२०१५