घर घर हैं बीमार कोरोना की ऐसी तेज रफ्तार,
इसी बीच अफवाहों का अजब गजब अवतार।
कोरोना महामारी है,नहीं है की होती तकरार,
एन मास्क या सर्जिकल मास्क सब है बेकार।
आक्सीजन की अस्पतालों में खूब है मार-मार,
आक्सीजन जरूरी है,सिलिंडर का हाहाकार। आक्सीमीटर,लेमुनाइजर का है बढा बाजार,
आपदा में अवसर ढूंढ हो रहा काला व्यापार।
धैर्य संयम दो गज की दूरी,मजबूरी नहीं जरूरी
पैंडेमिक में ना हों पैनिक मास्क में सुरक्षा पूरी।
नि:सहाय,बूढे बुजुर्गों को मदद की है दरकार,
युवाओं स्वयंसेवकों पर मानव रक्षा का भार।
हवा भी अब शत्रु बना,घर घर अन्दर दीवार,
खारे पानी में जैसे प्यासा हवाओं में संसार।
प्लेग,हैजा,टीवी से लड़े हैं ना हिम्मत तू हार,
कोरोना भी जायेगा जनता के साथ सरकार।
आंसू छलकते आंखों से देख के लम्बी कतार,
दौड़ते परिजन विलख रहे भर्ती से भी इन्कार।
बेड की क्राइसिस बता इंसान का तिरस्कार,
रूपये की बोली लगती,गरीब पर अत्याचार।
कोरोना काल में कई किसिम के धंधे कारोबार,
कहीं ब्लैक में एम्बुलेंस,पैरवी से दाह-संस्कार।
कोरोना तू हारेगा जीतेगा हमारा दृढ व्यवहार,
कई युगों को देख चुका,देखेगा इक्कीस पार।