एक दुनिया है। झूठ की दुनिया। जहाँ सिर्फ केवल झूठ चलता हैं। अगर वहाँ के लोग सच जैसा शब्द सुन ले तो उन्हें हैरानी होती हैं। वह सब एक-दूसरे का मुंह ताकते हैं और हैरानी से हंसते हैं कि ये कैसा शब्द है। इसी दुनिया का रहने वाला वह भी है। पर वह वो नहीं है जो इस झूठ की दुनिया में चलता हैं। वह सच है। सच के साथ है। पर उसके अंदर की सच्चाई, उसका सच इस झूठ की दुनिया में कहीं खो गया है।