Hindi Quote in Story by Sweety Sharma

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आज रिया काम में इतनी बिज़ी थी कि उसे वक्त का पता ही नहीं चला । जब थोड़ी फ्री हुई और टाइम देखा तो शाम के चार बज चुके थे। अब ना तो ये लंच टाइम रहा था ना पूरी तरह से इवनिंग स्नैक्स का टाइम हुआ था।
रिया अपना खाना घर से लाती थी , जो घर वाले सुबह उठकर उसके लिए बनाते थे ।
अब ना खाना भी गलत होता , जब इतनी मेहनत से सुबह उठकर बनाया गया हो।
रिया कैंटीन पहुंची और टिफिन खोल कर जैसे ही खाना शुरू करने लगी तभी उसे याद आया आज तो शांतनु का कोई फोन ही नहीं आया ।
रिया और शांतनु साथ मे ही लंच किया करते थे या कहे यही वो समय होता था जिसमे वो अपने सारे सुख - दुख एक दूसरे के साथ बांटते थे।
रिया ने टिफिन साइड किया और तुरन्त शांतनु को फोन मिलाया ।।
रिया - शांतनु तुमने खाना खा लिया ना !
शांतनु - रिया जब तुमने सुबह से कुछ नहीं खाया , तो मै अकेले कैसे खा सकता हूं ।
वैसे आज मैं तुम्हारे लिए राजमा चावल बना कर लाया था , तुम्हारे फेवरेट। तुम कहो तो ले आऊं , अगर तुम काम से फ्री हो गई हो तो ?
रिया - शांतनु की बातो से खुश भी हुई , उसकी खुद के लिए इतनी परवाह देख कर , ये सोचकर कि शांतनु पूरे दिन से उसका इंतज़ार कर रहा था। पर फिर भी उसने एक बार भी कॉल करके उसे डिस्टब नहीं किया ।
यहीं अगर अभी मैं होती तो कितना इरिटेट हो जाती। परेशान कर देती बोल बोल कर , कितना काम करोगे , सारा ठेका बस तुमने ही लिया है । बाकी काम बाद में कर लेना और लास्ट में करना है जो करो , तुम्हें वैसे भी मेरे बोलने से कहां फर्क पड़ता है कुछ !!

ऐसी गलतियां हम अक्सर करते हैं , लगभग रोज़ ही करते हैं । पर एहसास तब होता है जब वो इन्सान साथ नहीं होता ।
प्यार शब्दो का मोहताज नहीं होता , ऐसी छोटी - छोटी बातो से भी प्यार का एहसास किया और कराया जा सकता है ।

Hindi Story by Sweety Sharma : 111690011
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