देखो पवन भी, लहरा रही है
तुमको छू के
चोरी चोरी चुपके चुपके
कोई खुशी है हो हो
कोई खुशी है, जो गा रही है
तुमसे मिल के
चोरी चोरी चुपके चुपके
हमको ये लगता ही नहीं
तुम दूर कहीं से आई हो
जैसे मेरे सपनों में तुम्हारी
पहले से परछाईं हो
मुझको भी संग राह में तेरे
चलना अच्छा लगता है
पहला सफ़र है जीवन में जो
इतना सच्चा लगता है
रंग बदल के, मुस्का रही है
ख्वाहिश मन में
चोरी चोरी चुपके चुपके
देखो पवन भी...
कुछ ऐसे पल होते हैं जो
यादों में बस जाते हैं
सीधे साधे लोग कहाँ
इस दिल से वापस जाते हैं
दिल की भाषा ऐसी है जो
सब को समझ में आती है
लाख पराया हो कोई
अपना लेकिन ये बनाती है
शाम भी कहती, ये जा रही है
हमसे तुमसे
चोरी चोरी चुपके चुपके
देखो पवन भी...