•?((¯°·..• कलम-ए-इश्क •..·°¯))؟•
आसमान की ऊंचाइयों तक के सफ़र में
अपनी मिट्टी से रिश्ता तोड़ दूं तो मेरी कामयाबी किस काम का
दौलत के नशे में चाय का नशा छोड़ दूं तो नशे में रहना मेरा किस काम का
चाहत उजाले की हो अगर मन में अंधेरा लेकर
तो ऐसा उजियारा मेरे किस काम का
होगी सुबह एक दिन मेरे भी शाम की
थमेगा एक दिन मेरे अंदर का अंधेरा