जय संतोषी माता
शिव शंकर जी की पौत्री संतोषी माता तेरी जय होवे।
गणेश सुता सुहानी संतोषी माता तेरी जय होवे।
तेरे जयकारे जय जय मां तेरे भंडारे जय जय मां।
जय जय मां तेरी जय जय मां।
जय मां संतोषी तेरी जय होवे ।
मां संतोषी तेरी महिमा बड़ी निराली।
जय जय मां तेरी जय-जय मां।
मां संतोषी तेरी कृपा बड़ी अपरम्पार।
जय जय मां तेरी जय जय मां।
पार्वती सुत गणनायक जी की सुता बडी भोली ।
हे मां संतोषी तेरी महिमा गूंजे चहूं ओर।
हे मां संतोषी तेरी वंदना करुं कर जोड़।
उमा पति शंकर जी की पौत्री तेरी कृपा है निराली।
जय संतोषी माता मैया जय संतोषी माता।
जन जन की विधाता मैया जय संतोषी माता।
जग कल्याणी तेरी शरण में जो आते।
पार उतर जाते।
जय संतोषी माता मैया जय संतोषी माता।
भक्त गणों की सुख दाता।
सुख करणी दुःख हरणी संतोषी माता।
जय संतोषी माता मैया जय संतोषी माता।
लाल वस्त्र तुम्हें है भाता मैया संतोषी माता।
स्वर्ण मुकुट तेरे शीश पर शोभे।
मुक्ता मानिक हीरे पन्ने के कुंडल मन मोहे।
अल्पना बनाई चौका पुराई ।
रंग बिरंगे फूलों से सजाई।
माता संतोषी जी का करें सोलह श्रृंगार।
नव नव गीत गाएं हजार।
गुड़ और चना मैया जी को भोग लगाएं।
नारियल केला प्रसाद चढ़ाएं।
धूप-दीप और आरती उतारें।
ढोल ढाक झांझर और करताल बजाएं।
नर नारी और भक्त गण झूमे नाचे और गाएं।
मां संतोषी जी की आराधना करें।
सात सुहागिनें मिलकर मंगल गीत गाएं।
मां के चरणों में अर्चना करें।
पाएं कृपा अपार।
मैया संतोषी माता जय संतोषी माता।
भक्तों को दर्शन देती ।
दया दृष्टि दिखलाती ।
मां संतोषी की करुणा से हम संकट से मुक्ति पा जाते हैं।
जो भी मैया जी के शरण में आए सुख शांति पाते हैं।
माता संतोषी तेरे चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम।