जब उस शाम अकेले खड़े कही ढलते सुरज को देखोगे,
तुम क्या करोगे ?
जब किसी जगह पर अपने बीते बचपन को देखोगे,
तुम क्या करोगे ?
जब सारे अपनो और सपनों को बिछड़ते देखोगे,
तुम क्या करोगे ?
जब अपनी ही जिंदगी को लाचार होके देखोगे ,
तुम क्या करोगे ?
जब होगा मौसम सुहाना,
जब तुम्हे लगेगा अभी बहोत कुछ है पाना,
पर फिर भी अपनी सांसो को जाते देखोगे,
तुम....... #MR
*Everything is temporary so enjoy it while you can because...