सुख-दुख की बातों को दोहरा लेंगे
पढ़े गये पाठों को फिर पढ़ लेंगे,
स्नेह-प्यार से फिर-फिर मिल लेंगे
गुजरी राहों पर फिर क्षणभर हँस लेंगे।
बीती बातों को मोल नहीं दे पायेंगे
कह लेंगे,सुन लेंगे ,पत्रों में लिख देंगे,
शुद्ध हवा के झोंकों से जो आयेंगे
घर के कोनों पर बैठे मिल जायेंगे।
हरा-भरा विस्तार जीवन भर सोचेंगे
मित्रों के पाठ बहुत याद आयेंगे,
जिह्वा का स्वाद जी भर जी लेंगे
हर याद को पीकर हम सो जायेंगे।
* महेश रौतेला