गीत :--- नही टला हैं खतरा अब तक,,,,,,,,,
रचयिता :---- छगनलाल मुथा-सान्डेराव (ओस्ट्रेलीया)
नहीं टला हैं खतरा अब तक, क्यों जी रहे हो घबरा कर?
जाना हो अगर खास जरूरी,हर जगह मास्क तु पहना कर।
नहीं देना ज्यादा लोगों को न्योता, शादी ब्याह में आने का,
नहीं जाना उस फंक्शन में, जहां ज्यादा लोग हो आने का,
कौन नेगेटिव कौन पोजीटिव, नहीं लिखा किसी के माथे पर,
दूरी रखना खास जरूरी, हर जगह मास्क तु पहना कर।
किसने ये भोजन बनाया, किसने परोसा आपको थाली में,
किसने पानी पुरी का पानी घोलकर, दिया आपको प्याली में,
बाहर का स्वाद छोड़ देना,अब घर का खाना अपना कर,
साफ़ सफाई खास जरूरी, हर जगह मास्क तु पहना कर।
चली गई नोकरी कईयो की, व्यापार में भी नहीं है दम,
कैसे पाले परिवार को आगे, यही सोचते रहना है हरदम,
जो करना कम खर्च में करना, नहीं देखा-देखी शरमा कर,
बचत करना खास जरूरी, हर जगह मास्क तु पहना कर।
हाल देखो उस घर का,जिस घर में कोरोना आया था,
लुट गया परिवार किसी का, जैसे बुरी नजर का साया था,
अपनो की सुरक्षा अपने हाथ,'मुथा'की बात को समझा कर,
जाना हो अगर खास जरूरी, हर जगह मास्क तु पहना कर।
रचयिता :---- छगनलाल मुथा-सान्डेराव (ओस्ट्रेलीया)