विश्वाश कैसे दिलाऊ तुझे इश्क़ ए रूह का,
तू हर वक़्त टूटा छूटे पल के आशियाने में,
मुझे मेरा दिखता हुआ कल तोड रही है इस जमाने में,
हालात बता रहे है तू मुजेस दूर ना सही दूर हो जाने में,
और यही एक दर्द ले बैठा गुमरहा हूं समाज के सामने में,
Dear Zindagi 2❣