प्रातः कालीन मंगला वेला
*जीवन के हर कदम पर*
*हमारी सोच, हमारे बोल, तथा हमारे कर्म ही* *हमारा भाग्य लिखते हैं |*
*जो इंसान “खुद” के लिये जीता है,*
*उसका एक दिन “मरण” होता है।*
*पर जो इंसान ”दूसरों” के लिये जीता है,*
*उसका हमेशा “स्मरण” होता है।*
*🙏🏻
*सारे जगत को देने वाले*
*मैं क्या तुझको भेंट चढ़ाऊँ,*
*जिसके नाम से आए खुशबू*
*मै क्या उसको फूल चढ़ाऊँ !*
*वो तैरते तैरते डूब गये,*
*जिन्हे खुद पर गुमान था।*
*और वो डूबते डूबते भी तैर गये..*
*जिन पर तू मेहरबान था..!*
*🙏🏻
मित्रता की आयु अगर बढ़ानी
है तो स्वार्थ की मात्रा शून्य तक
ले जाना .....।
।।जय सियाराम जी।।
🙏हरि बोल जय श्री कृष्णा ॐ नमः शिवाय राम राम सा 🙏