Gujarati Quote in Thought by Narendra Parmar

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एक रात

एक रात मेरी जिंदगी में ऐसी आई थी

में उसकी जाल में से फंसकर

बचकर बहार आई थी ।।

सुंदरी नाम की लड़की छोटे से गांव में से शहर में पढ़ने आई थी सुंदरी अपने मामा के घर पर रहतीं थीं, जैसा सुंदरी नाम था उसका वैसा रुप भी था भगवान ने सुंदरी को बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा था, सुंदरी ग़रीब परिवार की लड़की थी मगर उसकी सुंदरता और लड़कियों से भी अमीर थीं

सुंदरी घर पर मां बाप और एक छोटा सा भाई अर्जुन था सुंदरी के उपर बहुत जिम्मेदारी थी सुंदरी पढ़ाई में बहुत अच्छी थी इसलिए उसने सोचा था कि में पढ़ लिखकर अपने मां बाप का सपना और अपनी गरीबी दूर कर सकती हुं

सुंदरी पहली दफा शहर में कदम रखा था और कोलेज करने आई थी,जब सुंदरी ने कोलेज में क़दम रखा तब कई लड़के उसके दिवाने हों गए उसको प्यार करने लगे मगर सुंदरी को प्यार में कोई इंटरेस्ट नहीं था क्योंकि सुंदरी के उपर बहुत जिम्मेदारी थी इसलिए सुंदरी ऐ सब बातों में ज़्यादा इंटरेस्ट नहीं ले रही थी सिर्फ अपने पढ़ाई में ही ध्यान दें रहीं थी

सुंदरी पढ़ाई के साथ साथ छोटा सा जोब भी कर लेती थी उसमें से सुंदरी पढ़ाई का खर्च निकाल लेती थी ताकि सुंदरी अपने मामा मामी को ज्यादा तकलीफ़ ना हो क्योंकि वो भी मजदूरी कर के जीवन चला रहे थे ऐसे ही सुंदरी को कोलेज में तीन महीने गुजर गए कई सहेलियां बन गई कई लड़के उसके दोस्त बन गए

उसमें से सुंदरी का एक दोस्त था अभिजीत वो भी सुंदरी को प्यार करता था मगर सुंदरी ऐ सब बातों में ध्यान नहीं रखतीं थी सिर्फ पढ़ाई हीं उसका मकसद था, अभिजीत पैसेवाला था उसके पास कोई कमी नहीं थी देखने जाएं तो उनके लिए पढ़ाई तो एक दिखावा है

मगर सुंदरी के लिए विद्या है एक सपना है उसकी एक जिम्मेदारी है उसकी गरीबी का अंत हैं मगर हरकोई ऐ बात नहीं समझता है, सुंदरी जिंदगी में एक दिन ऐसा आया बारीश का मौसम था बहुत बारीश गिर रहा था कोलेज छुटने का वक्त हो गया सुंदरी के मामा मामी को भी उसकी फिकर होने लगी थी कोलेज छुट गया मगर हर जगह पानी पानी सुंदरी की सहेलियां कहने लगी चलों मेरे घर सुंदरी बारीश खत्म होने पर तुम चली जाना अपने घर पर, सुंदरी ने कहा आप सब का शुक्रिया मेरे मामी फिकर करेंगे मेरी मुझे जाना पड़ेगा घर पर

ऐ बात सुनकर अभीजित आया तुम चिंता मत करो सुंदरी में आपको तुम्हारे घर पर छोड़ दूंगा तब सुंदरी पहली बार अभीजित की बाइक पर बैठ गई एक तरफ बारीश दिन होते हुए भी रात जैसा माहौल अभिजीत ने एक होटल पर बाइक रोक दिया तब सुंदरी तुरंत समझ गई उसने अभिजीत से कहा आज तुम मुझे घर पर छोड़ दो कल हम फिर आएंगे अभिजीत समझ गया मछली मेरे जाल में फंस गई है ऐसा कोई दिन आया हीं नहीं फिर सुंदरी ने अभिजीत से रिश्ता तोड़ दिया ।।

नरेन्द्र परमार " तन्हा "
काल्पनिक है

Gujarati Thought by Narendra Parmar : 111638816
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