जिंदगी 2020
जिंदगी कुछ थम सी गई है ,
जिंदगी कुछ थम सी गई है।
कब भोर हुई कब बीती शाम,
दिवस, मास बन हुए तमाम ;
शोख- बहारों के मौसम में
रुके रुके से सारे काम ।
जिंदगी कुछ थम सी गई है...
न तेरे आने का इंतजार,
न मेरे जाने की दरकार ;
मिलना- जुलना बंद किया सब
त्याग दिए सब लोकाचार ।
जिंदगी कुछ थम सी गई है.....
तीज- त्यौहार में नहीं उल्लास
शादी- ब्याह में नहीं परिहास
पाणि ग्रहण भी डरते- डरते
कोरेंटिन है मिलन की आस
जिंदगी कुछ थम सी गई है,
जिंदगी कुछ थम सी गई है
रचयिता - नीलम सक्सेना 'जयद'
संपर्क सूत्र - 9012919 330