इतना सब दर्द सहेजकर दिल में रखते हो,,,
दिल को फ़ौलाद इतना बनाते कैसे हो!!!
बचपन की हँसी, खुशी जवानी की छोड़ जाते हो,,,
उन जान से प्यारे दोस्तों से दूर रह पाते कैसे हो,,,
तुम फौजी,, दिल को इतना फ़ौलाद बनाते कैसे हो!!!
माँ की गोद में लोरी सुनते सोना,
बाबा के काँधे पर बैठने को तुम्हारा रोना,,,
एक एक पल जिया जो 'लाड़' में,उन्हें भुलाते कैसे हो,,,
तुम फौजी, आखिर दिल को अपने इतना फ़ौलाद बनाते कैसे हो!!!
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