इन सितारों की भीड़ मे एक सितारा ऐसा भी है|
जो सबसे जुदा है रौशन,
एक हुस्न-ए-नज़ारा ऐसा भी है|
उसके नूर के आगे बेनूर हुई जा रही ये महफ़िल भी आज,
उस कातिल निगाह का शरारा ऐसा भी है|
जल रहे है अरमान मौजूद हर जिगर मे,
जी रहे है तपिश से ही,
एक सहारा ऐसा भी है|
कर दे मुआफ़ वो ज़रा के हुस्न को इस कदर पढ रहा हू मैं,
पर मजबूर हू हाल-ए-दिल से,
तू ना जाने तेरा असर- करारा ऐसा भी है|
-(Ambalika Sharma)