आज दावा ए खुदा से हमने जन्नत माँगी ली,
महेलो जैसी सुन्दर रचना को हाथो की लकीर मान ली।
दुआ ए मुकमबल इश्क़ में एक साथ जीने कि जिंदगी माँगी,
कसमें की दीवानगी में एक हसरत ये जान दावेदार की कीमत माँगी।
वो जिंदा ही रख कर मुझे अपनी जोली में एक यादों की जंजीर में मंजिल माँगी,
तू बर्खास्त हुए इश्क़ के जमेले में खुदा से पैगाम में एक बंदगी मांगी।
DEAR ZINDAGI 🤗❣️