वाकिफ हूं में उसके जीने के ज़रिए से ,
डूबा हुआ उसकी ही आंखो के दरिये से।
गम की बरसात उनकी ले डूबे दुनिया से,
मालूम होते हुवे भी खमोश बने लफ़्ज़ों से।
जाया किया फिर भी ना समझ पाया अश्कों से,
क्या कहूं इसके बदलते इश्क़ के रंगीन वक्त से।
पानी लेकर खडा फिर भी जहर ही पिया जैसे सूखे पन से,
आज सुख रहा ये दिल जो पहले भरा रहता था खुशियों से।
DEAR ZINDAGI 🤗