By courtsey :- rekhta
ग़लती हो तो माफ़ करना🙏
ऐ सनम वस्ल की तदबीरों से क्या होता है
वही होता है जो मंज़ूर-ए-ख़ुदा होता है
..........मिर्ज़ा रजा बर्क
अंदाज़ अपना देखते हैं आइने में वो
और ये भी देखते हैं कोई देखता न हो
..... निज़ाम रामपुरी
क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो
ख़ूब गुज़रेगी जो मिल बैठेंगे दीवाने दो
....मिर्ज़ा दाद खां सज्जाद
क्या हो गया इसे कि तुझे देखती नहीं
जी चाहता है आग लगा दूँ नज़र को मैं
इस्माइल मेरठी
तुम मिरे पास होते हो गोया
जब कोई दूसरा नहीं होता
...... मोमिन खां मोमिन