यूँ तो ज़रा सी चोट पर लोग घुटने टेक देते हैं।
लेकिन गिर के फिर सँम्भल जाना यही जीवन है।
अपने लिए तो सब जीते हैं मगर
दूसरों की खुशी की ख़ातिर खुद बिखर जाना
यही जीवन है।
ज़रा सी आफत पर लोग संतुलन खो देते हैं।
सितम सह के मुस्कुराना
यही जीवन है।
मंज़िलों को पाने की तमन्ना सब को होती है।
कोई जीत कर हार जाए
यही जीवन है।
मुश्किलें,विपत्तियां औऱ संकट तो सब के साथी हैं
बावजूद इसके कुछ कर दिखाना
यही जीवन है.....
यूँ तो तमाम उम्र मुफ़्लिशि में बीती जिसकी
आंधियों में दिए जलाना
यही जीवन है।
प्रेम , स्नेह ये तो जिंदगी के हिस्से हैं अपने।
कोई किसी को भूल कर जिये
यही जीवन है।