ना हम किसीके,
ना हमारा है कोई ।
ना याद किसीको करते है अब,
ना हम याद आए किसीको, ऐसी ख़्वाहिश है कोई ।
बहोत जी लिया अपनो को खोने के डर से,
अब किसीको पाने या खोने की ना फिकर है कोई ।
अपना बना कर एक मुकाम पे लोग छोड़ ही जाते है,
जाते जाते ही सही, ये सच समझा गया कोई ।
दर्द दिल मे रखके लबों पे हँसी रखना सिख ही लिया हमने,
पर अब किसीको अपना बनाने की कोशिश भी मत करना,
ये सिखा गया कोई ।
~ रुचिता गाबाणी