🌼 *नूर* 🌼
है नूर जो उसका दर्शाया नहीं जा सकता शब्दों में
कैसे करूं अब इन्हें बयां अपने लफ्ज़ो में ।
पलकें बिछाए राहें सजी हैं -२
देख तेरे पीछे दुनिया भी खड़ी है।
रात बीत चुकी है सवेरा होने को तैयार है -२
इंतजार हो रहा है तेरा , कि कब तू आए और सुबह हो जाएं।
है नूर जो छाया आंखों में मेरी
वो नज़ारा .. वो पल, जिसे हर कोई देख दिवाना हो उठे
दिख रही है ऐसी रूहानियत उसमें
जिसे देखने के लिए दुनिया तरस रही
है अपार अदृश्य प्रकाश जिसमें
जैसे चमचमाते सितारे हो उसमें
दिदार किया है मैंने तेरा -२
क्योंकि हर रंग मुझे, तुझमें ही दिखा ।
है नूर में जो कृपा बरस रही -२
दर्शाऊ अब शब्दों में
पर कैसे करूं अब इन्हें बयां अपने लफ्ज़ो में ..... -२ ।🌼🌼
🙏🏻 धन्यवाद
( बी.के ) नविता